Friday, September 2, 2011

नया मुकाम

'तरक्की'
तब नहीं जब
कोई
बुलंदियों की
सीढ़ियाँ चढ़े
तब है
जब मिटने लगे
अन्दर की बेचैनी
और सुकूं बढ़े

आज ज़िन्दगी की राह पर एक नया मुकाम हासिल हुआ है।
आप सबका आशीर्वाद और प्यार यूँही बना रहे।

आप सबका
नीलेश


3 comments:

Vaanbhatt said...

अपना मुकाम शेयर नहीं करोगे...मिटने लगे बेचैनी और सुकूं बढ़े...बड़ा अचीवमेंट है...

Udan Tashtari said...

बधाई...क्या रहा मुकाम..यह तो बतायें.

Apanatva said...

aasheesh aur badhaaee.......
par huaa kya .....?