Tuesday, March 5, 2013

उस
नाकाम
के हाथों
होना
कोई
बड़ा
काम
लिखा था।

जिस
पत्थर को
बाँधकर की
उसने
दरिया में
ख़ुदकुशी,
.... उस पे
न जाने
किसने
 'राम' 
लिखा था .

आपका नीलेश, मुंबई 

1 comment:

दिगम्बर नासवा said...

बहुत खूब निलेष जी ...
पर पता नहीं वो भवसागर पार हुवा या नहीं ...