Thursday, July 23, 2009

हताशा को हताश कर दो !

कभी ...अगर ऐसा लगे की तुम्हारे लिए हर रास्ता बंद हो गया है... तुम्हे अब कहीं भी; कितना भी, कभी भी स्वीकार किए जाने की संभावना मात्र भी शेष नही है ... तो भी घबराना नहीं ! कभी ऐसा भी लगेगा कि लोग तुम्हारे लिए अपने दरवाज़े बंद कर रहे हैं; तो भी हताश न होना क्योंकि हो सकता है कि वो दरवाज़ा सिर्फ़ वो तुम्हारे लिए ही बंद नही कर रहे हों; अपने लिए भी कर रहे हों ...सिर्फ़ तुम उनसे वंचित नही हो रहे हो...हो सकता है वो भी तुमसे वंचित हो रहे हों... परिस्थितियां दोनों के लिए समान हो सकती हैं। वैसे भी जब बाहर के दरवाज़े बंद होते हैं; तभी अन्तस् का --अन्दर का दरवाज़ा खुलता है; इसीलिए ठुकराए जाने से कभी न डरो क्योंकि ...

ठुकराया जाना तो एकलव्य और कबीर होने की शर्त होता है!

आपका नीलेश
मुंबई २४-०७-२००९

11 comments:

Parul said...

gr8888

संगीता पुरी said...

ठुकराया जाना तो एकलव्य और कबीर होने की शर्त होता है!
क्‍या खूब कहा !!

ओम आर्य said...

बहुत सुन्दर ख्याल है आपके ....

'अदा' said...

ठुकराया जाना तो एकलव्य और कबीर होने की शर्त होता है!
ग़ज़ब की कल्पनाशीलता है...

मैं ठोकर खाके गिर जाऊँ, ऐसा हो नहीं सकता
गिर कर उठ नहीं पाऊं, ऐसा हो नहीं सकता

तुम हंसते हो परे होकर, किनारे पर खड़े होकर
मैं रोकर हंस नहीं पाऊं, ऐसा हो नहीं सकता

Udan Tashtari said...

उम्दा सदविचारों के लिए आभार.

Rakesh Singh - राकेश सिंह said...

संघर्षों से ही जीवन निखरता है |

अनिल कान्त : said...

अच्छी बातों के लिए आभार ...

मेरी कलम - मेरी अभिव्यक्ति

Babli said...

बहुत बढ़िया और शानदार लिखा है आपने! जीवन में संघर्ष करने से ही कामयाबी मिलती है!

raj said...

sahi kaha aapne.......a very gud post....thukraye jane se nahi darna chihye.....esme dono ka nuksaan hota hai.....thukrane wala bhi boht kuch kho deta hai...

Siddharth said...

Hamesh ki tarah iss bar bhi ek sandaar vichar....bahut bahut shukriya !

Priya said...

ठुकराया जाना तो एकलव्य और कबीर होने की शर्त होता है!
ग़ज़ब की कल्पनाशीलता है...kafi inspirational likhte hai aap