Monday, August 3, 2009

हम सब जानते हैं ...सिवाय

एक दिन एक जानने वाले का ख़त आया कि मैं आपके शहर में कुछ दिनों के लिए आ रहा हूँ ... आप मुझे किस अच्छे प्रवास स्थल के बारें में सूचित कर दें। मैंने सोचा ... मैं तो हमेशा इस शहर में अपने घर में ही रहा हूँ, तो फिर मैं कैसे जान सकता हूँ कि कौन सा प्रवास स्थल अच्छा है । जब इस पर गहन विचार किया तो लगा कि ये साधारण-सी बात अपने आप में कितना बड़ा फ़लसफा हो सकती है । बहुत बार हम ऐसी ही परिस्थितियौं में होते हैं, जब हम सब कुछ जानने का थोथा दावा तो करते हैं, पर उसी को नहीं जानते जो हमारे निकटस्थ होता है । ये हम स्वयं भी हो सकते हैं । इसीलिए शायद हमें और किसी की भी आवश्यकता पड़ती है, जो हमारे बारे में हमे बता सके । ये आँख बाहरी भी हो सकती है ... और हो सकता है कि हम स्वयं से ही निरपेक्ष होकर अपने को ही देखना सीख जाएँ ... परन्तु जब तलक ऐसा विकसित न हो जाए ... तब तक बाहर से ही अपने बारें में राय लेते रहिये ... ये बेहद जरूरी है, हम सब के लिए... क्योंकि ...

दुनिया से वाकिफ लोग
ख़ुद को कहाँ जानते हैं;
शहर की सरायों का हाल
मुसाफिर बेहतर जानते हैं


आपका नीलेश
Mumbai

2 comments:

Rakesh Singh - राकेश सिंह said...

निलेश जी बिलकुल सही लिखा है | अच्छा लिख रहे हैं , जारी रखिये |

Priya said...

wow ! wat a lines. good one