Tuesday, June 28, 2011

मजदूर

लगा सच
कि होती है
तकदीर
हाथ की
लकीर में
....
हाथ
कट गये
मेरे
जब से
मशीन में.

आपका नीलेश
मुंबई

3 comments:

Apanatva said...

kum shavdo me gahree baat .
Dukhad ghatna chubhta ahsaas ..

Vaanbhatt said...

हाँ कुछ लोग हाथों से अपनी तक़दीर लिखते हैं...

वन्दना said...

कटु सच्चाई।