Thursday, April 14, 2011

मुझे तो
वो आदमी भी
क़ातिल-सा दिखता है
पेड़ों को बचाने के लिए
जो किताबें लिखता है!


- आपका नीलेश जैन मुंबई


5 comments:

Apanatva said...

oof kya likh dala !
ganeemat hai mai seedha laptop par hee likh rahee hoo..........
:)

Vaanbhatt said...

ई-युग में कागज़ पर लिखना भी एक क्राइम होना चाहिए...

निर्मला कपिला said...

गागर मे सागर। आभार।

दिगम्बर नासवा said...

काग़ज़ पे लिखा भी ज़रूरी है .... कभी कभी छोटी छोटी जंग हारी जाती है बड़े युध के लिए ...

Uday Prakash said...

बहुत अच्छी कविता...!