Friday, January 27, 2012

baat wo nahi jo dikhti hai

जब
लोग

समझ रहे  थे
वो
अँधेरे में है
...
दरअसल
तब

सूरज

उसकी
मुट्ठी में था


आपका नीलेश

3 comments:

Vaanbhatt said...

वो अपने हिस्से की रौशनी निकल लेता था...और दूसरों के हिस्से कि रोशनी भी हज़म कर जाता था...हमारे अफसर और लीडर ऐसे ही हैं...

दिगम्बर नासवा said...

Bahut khoob.. Lajawab kalpana ...

Apanatva said...

bahut badiya.