Sunday, June 24, 2012

महानगरी

इधर 
किराये का 
टू बी. एच. के . मकान 
ठूंस-ठूंस के भरा है;
उधर 
पुश्तैनी 
तीन मंजिला घर 
खाली पड़ा है.

-----------------
आपका नीलेश, मुंबई
 

3 comments:

दिगम्बर नासवा said...

आज का कडुवा सच ...

koi nahi / कोई नहीं said...

मेरा तो सचमे यही हाल होने वाला है...

Vaanbhatt said...

सपनों के पंख होते हैं...जो हमें बहुत दूर ले जाते हैं...लेकिन अपनी नियति को फोल्लो करना भी ज़रूरी है...वर्ना इस छोटी सी ज़िन्दगी में कई मलाल रह जाते...