Tuesday, October 9, 2012



यूँ 
तो
तराश 
सकता 
है
' वो '
कांच  
भी 
जिसमें 
तराशने
की 
खूबी  है। 

मगर 
सह 
सके 
तराशने 
की 
मार 
' जो '
उसके 
लिए  
अन्दर
से 
हीरा 
होना 
ज़रूरी है ।।

आपका  नीलेश जैन 

2 comments:

Anonymous said...

bahut khoob

संतपाल said...

क्या खूब कहा सर जी