Wednesday, October 7, 2009

हद की सरहद से निकलना ही होगा....

अब हर हद की सरहद से निकलना ही होगा
मैं जानता हूँ हर हाल में मुझे चलना ही होगा

माना अब कोई नाखुदा नहीं
फिर भी अभी वो जुदा नहीं
ये एहसास दिल से आज भी करना ही होगा
मैं जानता हूँ हर हाल में मुझे चलना ही होगा

माना अब नहीं कोई आईना
मेरी सूरत के लिए
फिर भी मुझे औरौं के लिए सँवरना ही होगा
मैं जानता हूँ हर हाल में मुझे चलना ही होगा

माना अब कोई तराजू नहीं
मेरे ईमान की खातिर
फिर भी अपने ज़मीर के लिए तुलना ही होगा
मैं जानता हूँ हर हाल में मुझे चलना ही होगा

आपका नीलेश

1 comment:

Siddharth said...

NICE POST !!

माना अब नहीं कोई आईना
मेरी सूरत के लिए
फिर भी मुझे औरौं के लिए सँवरना ही होगा.......KYA BAAT HAI !!!!