Wednesday, November 4, 2009

वो दरख्त खो गए हम जिनकी शाख थे !


जो मैंने खोया ...
वो उसने भी खोया है ...
मेरी तरह वो भी बहुत रोया है ...
वो 'बड़ा' होकर भी मेरे छोटे भाई जैसा ही है ...
उस दिन लगा सब कुछ वैसा ही है ...

फर्क तो बस होता है जीते हुए इंसानों में
पर वो भी मिट जाता है आंसूं और श्मशानों में
नहीं तो भला क्या फर्क था उस दिन
उस आखिरी सफ़ेद लिबास में ...
उनके ठंडे पड़ चुके सर्द एहसास में ...
राम के नाम या चिता की तपन आग में ...
हमारी आँख की नमी या फिर 'राख' हो चुकी राख में ...
या उनके लिए कुछ कम कर पाने के गहरे पश्चाताप में ...
तब समझ आया बनता है नया रिश्ता दुःख की तपती आंच में !


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सादर नमन !
मौन शब्द- श्रद्धांजलि !!

नीलेश , मुंबई

11 comments:

दिगम्बर नासवा said...

GAHRI UR MAARMIK RACHNA HAI NEELESH JI .... SACH HAI KI ANTIM SAFAR MEIN SAB BARABAR HOTE HAIN KOI CHOTA BADAA NAHI HOTA ...

वन्दना said...

sach kaha kisi ko khokar hi uski keemat ka pata chalta hai aur har fark jeete ji ka hi hai aur har jhagda bhi , ek baar aankh band huyi to samjho sab shant.

पी.सी.गोदियाल said...

दिल के अन्दर की वेदना बहुत मार्मिक ढग से छलकाई मेरे दोस्त !

ओम आर्य said...

यह दर्द भी छलकते है तो उफनते सागर के माफिक .....सुन्दर रचना!

M VERMA said...

मार्मिक और भावपूर्ण्

Harkirat Haqeer said...

मार्मिक और भावपूर्ण् रचना.....!!

Harkirat Haqeer said...

मार्मिक और भावपूर्ण् रचना.....!!

Mired Mirage said...

बहुत सुन्दर व भावपूर्ण कविता लिखी है।
घुघूती बासूती

Udan Tashtari said...

बहुत गहन संवेदनाएँ लिये रचना अति मार्मिक!!

अम्बरीश अम्बुज said...

badi maarmik rachna hai....

सुशान्त सिंहल said...

नीलेश जी,
आप जिन मार्मिक अनुभवों से अभी हाल ही में गुजरे हैं उनका भी आपने सृजनात्मक उपयोग कर लिया है, यही आपका वैशिष्ट्य है। कुछ लोग ग़म ग़लत करने के लिये दारू की बोतल लेकर बैठ जाते हैं तो कुछ की पीड़ा उनको कुछ नया सृजन करने की राह पर ले चलती है। कन्हैया लाल नन्दन जी की कुछ पंक्तियां यहां उद्‌धृत कर रहा हूं जो मुझे बहुत प्रिय हैं और जो उन्होंने सन् ८० में मेरी डायरी में अंकित की थीं -

अजब सी छटपटाहट, कसक मन में, और है असह्य पीड़ा ।
समझ लो, साधना की अवधि पूरी है ।
अरे, घबरा न मन, चुपचाप सहता जा,
सृजन में दर्द का होना जरूरी है ॥

आपकी सृजनात्मकता के लिये आपका अभिनन्दन!

- सुशान्त सिंहल
www.thesaharanpur.com
www.sushantsinghal.blogspot.com