Sunday, November 29, 2009

Maaf kijiyega...

यहाँ पहले माँ को समर्पित एक रचना थी ... जिसे सम्पूर्ण विश्व का परम स्नेह मिला ....लेकिन कुछ वरिष्ठ लोगों की सलाह पर उसे यहाँ से हटा दिया है… जिससे कम-से-कम ये रचना तो किसी दुरूपयोग का शिकार न हो पाये. 

दुरूपयोग करने वालों को ईश्वर अपना रचनात्मक-आशीर्वाद दे और इतनी प्रतिभा भी कि वो खुद .....
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आपका नीलेश

4 जुलाई 2 0 1 3
मुंबई


6 comments:

दिगम्बर नासवा said...

नीलेश जी ....... कमाल की रचना है .... मिट्टी की सौंधी सौंधी गंध और माँ के दुलार की तरह ...... स्नेह का स्त्रोत की तरह बहती हुई लाजवाब रचना .........

नीरज गोस्वामी said...

अम्मा के बारे में क्या कहें...धरती को कागज़ और समुन्दर को स्याही बना कर भी लिखें तो उनकी महिमा पूरी नहीं होगी...बहुत भावपूर्ण रचना है ये आपकी...
नीरज

pv.kanpur said...

mummi ab mumbai main hain, lagta hai. itani hi adbhut rachana alok srivastava ki bhi hai amma per. kahin milyegi to bhejuoonga. adbhut hi shabd hai mere paas.

Apanatva said...

Bahut sunder rachanalagee bdee hee bhavpoorn aur sahee charitr chitran karatee huee.........
amma ke liye jitna likha jae kam hee hoga .

Ameet M.Shirodkar said...

A heart touching one, which todays' generation must really read where somewhere in busy life we forget our family & mostly our mother who is always back of us even in her absence.

Regards,
Ameet M.Shirodkar

Abhinava said...

We love your feelings, Convey my sincere regards to "AMMA", Good work done Neelesh, Keep it up.