Wednesday, February 24, 2010

अगर हो सके तो ....

अगर हो सके तो ...

इंसान मुकम्मल होना

अमन की ज़मीन में

अमन ही बोना ।


अगर हो सके तो

बिन मतलब के

कोई दोस्त बनाना

बिना शर्त का भी

एक रिश्ता निभाना

ख्वाहिशों को

हदों की हद

तक ही बढ़ाना

ईमान की चादर

तक ही पैर फैलाना

और जितना हो हासिल

उसे ही ख़ुशी से अपनाना

पर पाने की चाह में

ख़ुद को कभी खोना

क्योंकि

हर बात से ज़रूरी है

ख़ुद का होना ।


अगर हो सके तो

बिन कागज़

बिन क़लम

एक ऐसा भी

इतिहास लिखना

जिसमें इंसानी रिश्तों का

हर ज़ज्बात लिखना

पर जब तलक न हो

गहरे महसूस

तब तलक न

स्याही में

क़लम डुबोना

और लिखने में कुछ होना

तो हमेशा कबीर होना

अमन की ज़मीन में

अमन ही बोना


अगर हो सके तो

इंसान मुकम्मल होना

अमन की ज़मीन में

अमन ही बोना ....!!!


आपका नीलेश

मुंबई


10 comments:

Apanatva said...

lajawab rachana..............

दिगम्बर नासवा said...

अगर हो सके तो
इंसान मुकम्मिल होना
अमन की ज़मीन में
अमन ही बोना ....

वाह नीलेश जी ... सच कहा है अगर मुकम्मल इंसान हो जाए तो सब कुछ आसान हो जाएगा ...... बहुत गहरी बात लिखी है ....

निर्मला कपिला said...

और जितना हो हासिल

उसे ही ख़ुशी से अपनाना

पर पाने की चाह में

ख़ुद को कभी न खोना

क्योंकि

हर बात से ज़रूरी है

ख़ुद का होना ।और ये पँक्तियाँ

अगर हो सके तो

इंसान मुकम्मल होना

अमन की ज़मीन में

अमन ही बोना ....!!!
आपने कविता के माध्यम से एक सुन्दर और सार्थक सन्देश तो दिया ही है कविता के प्रवाह और रस को निभाया भी अच्छी तरह है बहुत अच्छी लगी कविता। लिखते रहें शुभकामनायें

परमजीत बाली said...

बहुत सुन्दर रचना है।बधाई।

Udan Tashtari said...

वाह!! उम्दा रचना..बेहतरीन संदेशात्मक अभिव्यक्ति!

vipz said...

bina matlab ke rishta nibhana,bina matlab ke dost banana...very good lines mosaji...wow...this is good...

jayanti jain said...

बिन मतलब के

कोई दोस्त बनाना

बिना शर्त का भी

एक रिश्ता निभाना

great

Apanatva said...

Happy holi......

सिद्धार्थ प्रियदर्शी said...

श्रधेय गुरूजी !!
सदर प्रणाम...
बहुत दिनों के बाद आप को पढ़ पा रहा हूँ...हर बार की तरह एक बेहतरीन पोस्ट ....


अगर हो सके तो
बिन कागज़

बिन क़लम
एक ऐसा भी

इतिहास लिखना
जिसमें इंसानी रिश्तों का
हर ज़ज्बात लिखना
पर जब तलक न हो

गहरे महसूस
तब तलक न


स्याही में

क़लम डुबोना



इन पंक्तियों को सलाम करता हूँ.....अगली पोस्ट का बेसब्री से इंतज़ार रहेगा....

amita said...

अगर हो सके तो

बिन मतलब के

कोई दोस्त बनाना

बिना शर्त का भी


एक रिश्ता निभाना
bahut sunder rachna hai