Monday, March 15, 2010

महलों में भला कौन बुद्ध बना है ...

समय कठिन होता है .... तो लम्बा लगता है। पर ये भी तो सच है न कि वो जीवन के सबसे बेहतर सबक सिखाता है। बुरे वक़्त का इम्तिहान ... अच्छा बनाता है। ऐसे में सब ठहरा लगता है ...पर अन्दर बहुत कुछ सक्रिय होता है ... आत्म शोध से लकर आत्म बोध तक की यात्रा ऐसे ही असीम क्षणों में तय की जाती रही है ..... सुख सुलाता है; तो दुःख जगाता है ... तपाता है ... गौतम को 'बुद्ध' बनाता है ... पर बुद्ध बनने के लिए सुख का आसन त्यागना ही होता है ... महलों में भला कौन बुद्ध बना है ?
इसीलिए कठिनाई को सर आँखों पर रखो और अपने आराध्य को इसके लिए धन्यवाद दो कि उसने तुम्हें इसके लिए चुना और अगर कोई आराध्य ही न हो तो कठिनाई को - बुरे वक़्त को ही 'आराध्य' बना लो... फिर कभी भी... कुछ भी ... नकारात्मक न होगा ... न लगेगा... और जब लगेगा नहीं ... तो होगा नहीं।

आपका नीलेश
मुंबई

7 comments:

Apanatva said...

bahut sunder sandesh ..............

rahat said...

Jaane kyon laga tum "prerna" ke srot ho.....
Man k "antarduandon" ka tum hi to patakshep ho........
Hriday k anant bhavon ka "aadhar" ho tum hi.....
Meri jeevan drishti ka "sanchar" ho tum hi.........
Aa jao Allahabad men....
Ki hindi ki 'tum hi' to "AWAZ" ho..... (sir sorry 4 tum )

सिद्धार्थ प्रियदर्शी said...

एकदम सही और सटीक सन्देश दिया है आपने....

"समय कठिन होता है .... तो लम्बा लगता है। पर ये भी तो सच है न कि वो जीवन के सबसे बेहतर सबक सिखाता है। बुरे वक़्त का इम्तिहान ... अच्छा बनाता है। ऐसे में सब ठहरा लगता है ...पर अन्दर बहुत कुछ सक्रिय होता है ... आत्म शोध से लकर आत्म बोध तक की यात्रा ऐसे ही असीम क्षणों में तय की जाती रही है .."

बुरा वक़्त आदमी को इंसान बना देता है....
लाजवाब, बेहतरीन और बेहद शानदार प्रस्तुति...

vipz said...

mehlon mein bhala kon buddh bana hai...very nice article mosaji...

vipz said...

mehlon mein bhala kon buddh bana hai...very nice article mosaji...

vipz said...

mehlon mein bhala kon buddh bana hai...very nice article mosaji...

vipz said...
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