Wednesday, April 13, 2011

तन भी भीगा ... मन भी भीगा

तब
तन भी भीगा
मन भी भीगा
जब
मैंने गिरती बारिश से
पानी के धागे मांग लिए
और
अपनी आँख के कुछ आंसूं
उसके साथ में बाँध लिए ।

- नीलेश
मुंबई

6 comments:

Vaanbhatt said...

बारिश कुछ ऐसी ही होती है...जब तक तन और मन दोनों ना भीगे...मज़ा नहीं आता...

वन्दना said...

चंद शब्दो मे ही दर्द उतार दिया दिल का।

वन्दना said...

आपकी पुरानी नयी यादें यहाँ भी हैं .......कल ज़रा गौर फरमाइए
नयी-पुरानी हलचल
http://nayi-purani-halchal.blogspot.com/

ana said...

bahut sundar kavuta

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

मार्मिक ..

ana said...

bahut badhiya post-:)